बाओ कुंग का अनोखा न्याय
बाओ कुंग(999-1062)चीनी इतिहास के अग्रणी चमत्कारिक व्यक्तियों में थे। वे एक नेकदिल,निष्पक्ष, होशियार तथा न्यायपूर्ण प्रशासक थे। इसी वजह से चीन के अंय महापुरुषों
की तरह उनके महान कार्यों के बारे में भी कई किंवदंतियां चीनी समाज में
प्रचलित हुई। नीचे दी गई कहानी भी उनमें से एक है।
बहुत साल पहले की
बात है। एक छोटा बच्चा एक पहाड़ी गांव में रहता था। वह बहुत गरीब था। उसके पिता की
मृत्यु होगई थी। मां बीमार रहती थी। परिवार की आजीविका चलाने का भार इस बच्चे के
नाजुक कंधों पर था।इस कारण इसका जीवन बड़ा कष्यमय था।
वह हर रोज पौ फटते ही उठ
जाता। तेल में तले हुए डबल रोटी के लच्छे(टुकड़े या डंडिया) टोकरी में रख कर वह टोकरी को कंधे में
लटका लेता। फिर तेज भागते हुए आवाज लगाता तली हुई डबल रोटी के स्टिक्स ले लो, तली
हुई डबल रोटी के स्टिक्स ले लो, कुरकरी स्वादिष्ट डबल रोटी के स्टिक्स ले लो, दो
पैसे की डबल रोटी के स्टिक्स ले लो । इस तरह फेरी लगाते हुए वह तली हुई डबल रोटी
के लच्छे बेचता था।
एक दिन उसकी सारी डबल रोटी जल्दी बिक गई। वह सड़क के किनारे एक बड़े से पत्थर पर बैठ गया और सुस्ताने लगा। उसने टोकरी
में रखे तांबे के सिक्कों को एक एक कर गिना। कुल एक सौ सिक्के थे। तेल में तली डबल
रोटी की डंडिया बेचते समय उसके दोनों हाथों में तेल लग जाता था।इन तेल लगे हाथों
से पैसे गिनने में तांबे सिक्कों में भी तेल लग गया था। तेल से चमकते इन सिक्कों
को देख कर वह बहुत खुश हुआ। उसने सोचा आज मैंने 100 सिक्के कमाए हैं। इनमें से कुछ
सिक्को से मैं मां के के लिए दवाई खरीद सकता हूं।
यह सोचते सोचते उसने अपना सिर उस पत्थर पर टिका दिया। वह जल्दी
ही गहरी नींद में सो गया। थोड़ी देर में वह जागा। उसने सोचा कि मुझे फटाफट मां को
दवाई खरीद कर देनी चाहिये। वह उठ खड़ा हुआ । परन्तु यह क्या टोकरी में तो एक भी
सिक्का नहीं था। यह देख कर बेचारा बच्चा सन्न रह गया। हैरान परेशान नन्हा बच्चा
जोर जोर से वू वू कर रोने लगा। ठीक इसी समय न्यायाधीश बाओ कुंग अपने लाव लश्कर
(सैनिकों तथा घोड़ों) के साथ उस सड़क से
गुजरे।
बाओ
कुंग का रंग सांवला था। उनकी दाढ़ी भी काली थी। कुछ लोग उनको सांवले बाओ कुंग कहते
थे तो कुछ बाओ कुंग काले कहते थे।वह बहुत होशियार व न्यायपिर्य अधिकारी थे। बाओ
कुंग ने देखा कि छोटा बच्चा दहाड़ें मार कर रो रहा है और बहुत दुखी है। उन्होंने
उस छोटे बच्चे से पूछा कि वह क्यों रो रहा है।बच्चा वू वू कर
रोते हुए बोला मेरे ताबे के सिक्के नहीं दिख रहे हैं। मैंने वे सिक्के डबलरोटी की
तली हुई डंडिया बेच कर कमाए थे। बाओ कुंग ने पूछा क्या तुम्हारे पैसे चोरी हो गए।
बच्चा बोला मालूम नहीं। मैं इस पत्थर का
सहारा लेकर जैसे ही लेटा था । मुझे नींद आगई। नींद से जागा तो देखा टोकरी में पैसे
नहीं हैं। ऐसा कह कर वह फिर वू वू कर रोने लगा।
बच्चे
की बात सुनकर बाओ कुंग कुछ देर तक सोचते रहे फिर एकाएक बोले मैं जान गया हूं। मैं
जान गया हूं। पक्का इसी पत्थर ने तुम्हारे पैसे चुराए हैं। मैं इस पत्थर से पूछताछ
करूंगा।इसको आदेश दूंगा कि वह सिक्के तुम्हें लौटाए।पास खड़े तमासबीनों ने जब सुना
कि बाओ कुंग पत्थर से पूछताछ करने वाले हैं तो चौंक गए।यह जानने के लिए कि बेजान
पत्थर से कैसे पूछताछ की जा सकती है सभी पत्थर के चारों ओर खड़े होकर जोर जोर से
आपस में बतियाने लगे। बाओ कुंग ने उस पत्थर से पूछा पत्थर पत्थर क्या तुमने छोटे
बच्चे के तांबे के सिक्के चुराए हैं। पत्थर बोल तो नहीं सकता। इसलिए कोई उत्तर
नहीं आया। बाओ कुंग ने फिर कहा पत्थर पत्थर तुमने छोटे बच्चे के तांबे के सिक्के
चुराए हैं क्या। जल्दी बोलो जल्दी बोलो। पत्थर से अभी भी कोई आवाज नहीं आई। वह
पूरी तरह चुप रहा। पत्थर बोल नहीं सकता है। पर बाओ कुंग का गुस्सा सातवें आसमान पर
था। उसने धमकाया पत्थर तुम सच्ची बात नही बताओगे तो मैं तुम्हारा सिर तोड़ दूंगा।
अधीनस्त कर्मचारियों ने जब बाओ कुंग का यह
आदेश सुना तो आव देखा न ताव लाठी लेकर पत्थर को पीटने लगे। वे पत्थर को पीटते भी
और कहते भी कि जल्दी बोलो जल्दी बोलो।
पास
खड़े तमाशबीन उनकी इस हास्यासप्रद हरकत का मजा लेरहे थे और बाओ कुंग का खूब मजाक उड़ा रहे थे।
हंसते हुए वे कहने लगे कि पत्थर कैसे पैसे चोरी कर सकता है। पत्थर कैसे बोल सकता
है। सबने कहा बाओ कुंग बहुत होशियार अफसर रहा है। यह पुरानी कहावत हो सकती है। आज
तो ऐसा नहीं लगता। बाओ कुंग ने सुना तो बहुत गुस्सा होगए और
बोले मैं पत्थर से पूछताछ कर रहा हूं। आप लोग क्यों मेरी आलोचना कर रहे हैं। थोड़ी
देर सोच कर फिर चिल्लाए आप सबकी सजा है कि सभी एक एक पैसा जुर्माना दें। इसके बाद अपने
अधीनस्त कर्मचारी को आदेश दिया कि वह एक खाली बर्तन लाए और उसमें पानी भर दें। वहां
पर खड़े तमाशबीनों से कहा कि वे एक एक कर पानी भरे इस बर्तन में सिक्का डालें। अब
तमाशबीनों के पास लाइन लगा कर एक एक करके सिक्का डालने के अलावा और कोई चारा नहीं
था। फुथुंग फुथुंग पानी भरे बर्तन में एक एक कर सिक्के गिरने की आवाज आने लगी।
भीड़ में से एक आदमी ने जैसे ही पानी में सिक्का फैंका बाओ कुंग ने अपने सहायक को
आदेश दिया कि उसे पकड़ ले आए। बाओ कुंग ने इस आदमी से कहा तुम्ही चोर हो। तुम्ही
ने छोटे बच्चे के पैसे चुराए हैं। सभी को बहुत आश्चर्य हुआ। यह कैसे संभव है। बाओ
कुंग ने कहा तुम लोग खुद देखो केवल इसके फैंके सिक्के से पानी सतह में तेल की एक
परत आगई है। इसका सिक्का अवश्य ही सोते समय बच्चे की टोकरी से चुराया गया सिक्का
है। उस चोर के पास अब कोई उपाय नहीं बचा था। उसने चुपचाप चोरी के सारे सिक्के लाकर
बच्चे को दे दिये। सभी ने बाओ कुंग की होशियारी की दाद दी।
(ये कहानी चीनी तथा अंग्रेजी भाषा में http://chinesereadingpractice.com/category/beginner/childrens-stories/
में उपलब्ध है। मुझे लगा कि हिंदी भाषी भी इसे पसंद करेंगे। इसीलिए
हिंदी में अनुवाद करने की कोशिश की।)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें