सोमवार, 2 मई 2016

सुअर का पिक्निक जाना

सुअर का पिक्निक जाना
सुबह सुहानी थी। सुअर सोकर उठा तो सुहावना मौसम देखकर खुश हो गया। सोचा क्यों न सखी के साथ पिकनिक जाया जाए। बस फिर क्या था सुअर जी खूब बन सवर कर गुनगुनाते हुए अपनी सखी के घर की ओर चल दिये। सखी को पिकनिक पर चलने के लिए राजी करना था। इसलिए उसके लिए एक फूलों का गुलदस्ता भी खरीद लिया। इस प्रकार हाथ में गुलदस्ता लिए सजे धजे सुअर को रास्ते में मस्त मस्त जाते देखकर मित्र सियार ने टोका और इस मस्ती का कारण जानना चाहा। सियार को जब पता चला कि सुअर अपनी सखी के साथ पिक्निक जा रहा है तो उसने झट से एक सुझाब दे डाला और कहा यदि सुअर सियार की सुंदर सी पूंछ उधार लेकर लगा ले तो सखी उसे देखते ही मंत्रमुग्ध हो जाएगी। सियार की सुंदर सी पूंछ लगाकर सुअर भी सियार की तरह चतुर चालाक लगेगा। सुअर को प्रस्ताव जच गया।खट से सियार की पूंछ लगा ली और खूब खुश हुआ। सुअर सियार की पूंछ लगा  हाथ में गुलदस्ता लिए थोड़ी ही दूर चला था कि एक और दोस्त शेर खान मिल गया। शेर खान को जब पता चला कि सुअर सखी को साथ पिक्निक मनाने जारहा है तो खूब खुश हुआ और सुझाव दिया कि सुअर अपनी मित्र पर रौब गाठने के लिए शेर खान के सिर के बाल लगा ले। इन वालों की वजह से  सुअर भी शेर खान की तरह ही निर्भीक व शक्तिशाली लगेगा। इसका सुअरी पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। सुअर ने फटाफट शेर के सिर के बाल लगा लिए और बहुत संतुष्ट हुआ। सियार की पूंछ ,शेर के बाल लगाकर सुअर कुछ दूर और चला ही था कि उसे एक और दोस्त जेबरा मिल गया।जेबरा ने भी पिक्निक जाने के लिए सखी को राजी करने की कहानी सुनी और सुझाया कि यदि सुअर जेबरा की सुन्दर सी धारियों को उधार लेकर लगा लें तो इतना खूबसूरत लगेगा कि उसकी सखी उस पर इतनी मंत्रमुग्ध हो जाएगी कि  सुअर को मना नही कर पाएगी।सुअर ने जेबरा का सुझाव भी मान लिया और उसकी सुंदर सी धारियां भी लगा ली।इतना सारा श्रंगार करने से सुअर आत्ममुग्ध होगया। उसको लगा कि वह इतना छैल छबीला कभी नही दिखता था।आखिर वह सुअरी के घर पहुंच ही गया। उत्तेजना व अति उत्साह में जोर जोर से सुअरी के घर के दरवाजे खटखटाने लगा।सुअरी ने घर के अन्दर से ही पूछा कौन है और क्यों आया है। सुअर ने साथ पिक्निक चलने का प्रस्ताव रखा तो सुअरी इस बहुरुपिये सुअर को देखकर डर गई। उसने लम्बी छलांग लगाई  और जोर से चिल्लाई बिलकुल नहीं। भारी भरकम राक्षस तुम कहां से आए हो। यहां से फटाफट चले जाओ नहीं तो मैं अपने दोस्त सुअर महाशय को बुला लाउंगी। वह तुम्हें ठीक कर दैंगे। सुअरी का गुस्सा देखकर सुअर के होश उड़ गए वह दुम दबाकर वहां से वापस भागा। रास्ते में जेबरा की सुन्दर धारिया उतार कर जेबरा को वापस की। सर के बाल उतार कर शेर खान को वापस किये। और पूंछ उतार कर सियार को वापस की। अब अपने असली रुप में जल्दी  जल्दी वह सुअरी के घर को चल दिया। घर पहुंच कर उसने सुअरी के घर की घंटी जोर से बजाई और सुअरी से पूछा कि वह उसके साथ पिक्निक जाना पसन्द करेगी। अरे आप सुअरी चिल्लाई। आपको देख कर मुझे बड़ी खुशी होरही है। मुझे आपके साथ पिक्निक जाने में बड़ा मजा आएगा। अभी कुछ समय पहले एक भद्दा जीव मेरे घर के अहाते में घुस आया था। उसे देख कर मुझे बहुत डर लगा। रास्ते में सुअरी ने उस भद्दे राक्षस के रंग रूप के बारे में अपने छैल छबीले दोस्त सुअर को बताया। सुअर  पूरे मनोयोग के साथ उसकी गाथा सुन रहा था और सोच रहा था कि वास्तव में आज पिक्निक जाने का अच्छा दिन है।

(ये कहानी चीनी तथा अंग्रेजी भाषा में  http://chinesereadingpractice.com/category/beginner/childrens-stories/ में उपलब्ध है। मुझे लगा कि हिंदी भाषी भी इसे पसंद करेंगे। इसीलिए हिंदी में अनुवाद करने की कोशिश की।)


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