नन्हा हाथी चला उड़ने
अपने जन्म के तीसरे दिन ही नन्हा हाथी अपनी मां के साथ नदी किनारे
पानी पीने गया।वहां उसने एक छोटी सी चिड़िया को खुले आकाश में मस्ती करते देखा।
बेबी हाथी ने सोचा कि यदि मैं भी उड़ सकता तो मैं भी आकाश से बहुत सारी चीजें देख
सकता और मुझे बड़ा मजा आता।नन्हा हाथी उड़ना सीखने के लिए पास के पेड़ पर चढ़ गया
और उड़ने के लिए छलांग लगा दी। आकाश में उड़ने के बजाय हाथी धड़ाम से जमीन पर गिर
गया। एक सांप ने बेबी हाथी को गिरते देखा और समझाया कि हम सब जीव जन्तुओं की अपनी
अपनी क्षमताएं तथा कमजोरियां हैं। उदाहरण
के लिए मैं सांप उड़ नहीं सकता पर मैं पेड़ में जाकर सो सकता हूं। सांप के बाद शेर ने
भी नन्हे हाथी को समझाया कि वह भी उड़ नही सकता परन्तु वह छलांग लगा कर चौड़ी
चौड़ी नदियों को पार कर सकता है। चीता ने कहा वह भी नहीं उड़ सकता परन्तु वह पानी
में तैर सकता है। अन्त में नन्हे हाथी के माता पिता ने समझाया कि हम हाथी बहुत
ताकतवर जीव हैं। छोटी चिड़िया इसमें हमारी बराबरी नहीं कर सकती।हाथी के बच्चे को
माता पिता की बात समझ आगई। उसने अपनी सूंड से एक बड़ी सी लकड़ी को उठा लिया और
वापस घर की ओर चलने लगा।
(ये कहानी चीनी तथा
अंग्रेजी भाषा में http://chinesereadingpractice.com/category/beginner/childrens-stories/
में
उपलब्ध है। मुझे लगा कि हिंदी भाषी भी इसे पसंद करेंगे। इसीलिए हिंदी में अनुवाद
करने की कोशिश की।)
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