सोमवार, 21 मई 2012

दृष्टिबाधित ने चीनी सरकार को झुकाया।

छन क्वाङ छङ,चीन सरकार, मानव अधिकार, 
 20 मई 2012 को जोनाथन वाट्स  ने बेइचिङ तथा पौल हैरिस ने न्यूयार्क से बताया कि छन क्वांङछङ करीब एक महिने की जद्दोजहद के बाद आखिर सपरिवार चीन से अमेरिका पहुच गए।वहां पर वह न्यूयार्क विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई करेंगे।  2006 में छन क्वांङछङ को इसलिए गिरफ्दार कर लिया गया था कि उन्होंने शानतुङ प्रांत के लिनई काउंटी में एक साल में 130,000 महिलाओं के जबरदस्ती किेये गए गर्भपात तथा नसबंदी का भंडाफोड़ किया। इसी साल टाइम्स मैगजीन ने उनको समाज की तकदीर बदलने की कोशिश कर रहे सबसे प्रभावी 100 पुरुषों शामिल किया। 2007 में उन्हें मैकसेसे पुरुष्कार से सम्मानित किया गया। परंतु चीन में छन को इस दुस्साहस के लिए चार साल तीन महिने का कारावास मिला। सितंबर 2010 से उन्हें घर पर ही नजरबंद किाया गया।[1] इस दौरान छन के पूरे परिवार के साथ हिंसा तथा दुर्व्यवहार किया जाता रहा।उनके घर की बार बार तलाशी ली जाती। जगह जगह सीसीटीवी कैमरा लगे रहे। उनके पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।छन की आयु 40 साल है। वह बचपन से ही दृष्टिबाधित हैं तथा बहुत ही गरीब परिवार से हैं।शैक्षणिक सुविधाओं की कमी के बावजूद अपनी मेहनत तथा लगन से वह कानून की पढ़ाई कर सके।प्रारंभ में उन्होंने स्थानीय किसानों की समस्याओं को उठाना आरंभ किया।इस दौरान स्थानीय सरकार उनसे खुश थी। कारण वह विकलांगों की समस्याएं उठा रहे थे।लेकिन जबरन गर्भपात का मुद्दा उठाना सरकार को रास नहीं आया।
22 अप्रेल 2012 को छन ने किसी तरह भाग कर अमेरिकी दुतावास में शरण ली। इसी दौरान हिलेरी क्लिंटन चीन पहुची। इससे चीन व अमेरिका के रिस्तों की सहजता प्रभावित हुई। किसी तरह मना कर अमेरिका ने छन को दूतावास से अस्पताल पहुचाया।अब करीब एक महिने की जद्दोजहद के बाद छन को सपरिवार अमेरिका जाने की अनुमति चीन ने दे दी।[2]



[1] http://www.womensrightswithoutfrontiers.org/blog/?p=296


[2] http://www.tibet.ca/en/newsroom/wtn/12298, http://www.tibet.ca/en/newsroom/wtn/12303

 




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