शुक्रवार, 24 जून 2011

इनके कोई अधिकार नहीं है?

आज के जनसत्ता-हिंदी समाचार पत्र के मुख पृष्ट पर दो बृद्ध किसानों का चित्र छपा है। इनमें एक अपनी बेवसी पर फूट फूट कर रो रहा है तो दूसरा अपनी पथराई आखों में सारी बेवसी लिए गुमशुम बैठा है। इन दोनों की यह हालत पोस्को कंपनी के लिए अधिग्रहीत की जारही कृषि भूमि की वजह से है। पोस्को के साथ किया गया एमओयू कल समाप्त हो गया है।उसका फिर से नवीनीकरण नहीं हुआ है। लेकिन सरकार इस कंपनी को सौंपने के लिए अधिग्रहीत भूमि पर चारदीवार खड़ी करने में लगी है। इस पूरी प्रक्रिया में इन गरीब किसानों की फसल भी उजाड़ दी गई है। उसी गम में बेवस होकर गरीब किसान फफक फफक कर रो रहा है।
रोते बिलखते इन किसानों का चित्र देख कर मन बरबस सवाल पूछने लगता है कि क्या हमारे देश में कानून का राज है। क्या इन किसानों के संविधान के तहत कोई अधिकार है।क्या कानून के राज की रक्षा के लिए जिम्मेदार कोई संस्था इस चित्र का स्वो मोटो संज्ञान लेगी और इन किसानों को न्याय दिला पाएगी।